Wednesday, June 3, 2020

परमेश्वर कबीर साहिब द्वारा बताया गया आध्यात्मिक ज्ञान।





परमेश्वर कबीर जी सतलोक से चलकर आते हैं और अपनी पुण्य आत्माओं, भक्तो को मिलते हैं और अपने वास्तविक आध्यात्मिक ज्ञान की जानकारी स्वंम ही देते हैं जो इस प्रकार हैं...!!

सर्वप्रथम कबीर साहिब जी ने ही बताया कि परमात्मा साकार है, सशरीर है, और नराकार रूप में राजा के समान दर्शनीय व सिहासन पर विराजमान है जबकि अन्य धर्मगुरु व अन्य धर्म पंथ के लोग मानते हैं कि परमात्मा निराकार है जिसका कोई अस्तित्व नहीं है
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Saint kabir das


वही कबीर परमेश्वर जी ने लोगों को धार्मिक पाखंडवाद, अंधविश्वास, कर्मकांड तथा शास्त्रविरुद्ध साधना से दूर रहकर एक पूर्ण परमात्मा की भक्ति करने का संदेश दिया। ताकि साधक को उसके साधना के अनुरूप लाभ प्राप्त हो सके।

एकै साधे सब सधे, सब साधे सब जाय।
माली सीचैं मूल‌ कूं, फलै फूले अघाय।।



कबीर परमेश्वर जी ने शास्त्र अनुकूल भक्ति तथा शास्त्र विरूद्ध भक्ति का भेद बताया शास्त्र अनुकूल साधना करने से सुख व मोक्ष संभव है तथा शास्त्र विरुद साधना करने से जीव हानि तथा नरक व चौरसिया कष्ट सदैव बना रहेगा...!!
जिसका प्रमाण
गीता अध्याय 16 श्लोक 23-24 में भी हैं

ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में प्रमाण हैं।
वेद ज्ञान दाता कह रहा है की बच्चे रूप में प्रकट होकर पूर्ण परमात्मा कविर्देव(कबीर साहेब)अपने वास्तविक ज्ञानको अपनी कबीर वाणीयो द्वारा निर्मल ज्ञान को अपनी हंसात्माओं अर्थात् आत्माओं को कवि रूप में कविताओं, लोकोक्तियों के माध्यम से सम्बोधन करके अर्थात् उच्चारण करके खुद ही आकर वर्णन करता है। वह स्वयं सतपुरुष कबीर ही है।


 आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज कबीर परमेश्वर द्वारा बताए गए आध्यात्मिक ज्ञान को जन जन तक पहुंचा रहे हैं तथा सही भक्ति विधि बता रहे हैं ताकि जीव कल्याण हो सके। अधिक जानकारी के लिए देखें साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 pm

Tuesday, June 2, 2020

कबीर साहेब जी के चमत्कार...!!


600 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर जी सतलोक से सशरीर चलकर आये तब अनेकों चमत्कार किये जो केवल समरथ भगवान ही कर सकता है इस प्रकार है...!!!



कबीर परमेश्वर जी ने मगहर रियासत में 14वी शताब्दी में पड़े भीषण अकाल को अपनी समर्थ शक्ति से टालकर वर्षा करके सबको जीवनदान दिया। हजारों हिंदू-मुसलमानों ने उपदेश लिया। एक 70 वर्षीय निःसंतान मुसलमान दंपती को पुत्र होने का आशीर्वाद दिया। वर्तमान में उस व्यक्ति का एक पूरा मौहल्ला बना हुआ है, नाम है "मौहल्ला कबीर करम"


स्वामी रामानंद जी के शिष्य सर्वानंंद जी एक बार कबीर साहेब से ज्ञान चर्चा करने गए।
कबीर साहिब ने उन्हें शास्त्रार्थ में हरा दिया। लेकिन उपस्थित लोगों ने सर्वानंद को धारा प्रवाह संस्कृत बोलते देख यह कहा कि सर्वानंद शास्त्रार्थ में जीत गए।
कबीर साहिब ने कहा कि आप सामने लिखे शास्त्रों की सच्चाई को भी नहीं मान रहे हो। जो जानबूझकर सोने का बहाना कर रहा है उसे जगाया नहीं जा सकता।
"कबीर जानबूझ साची तजे, करे झूठे से नेह, ताकि संगति हे प्रभु, स्वप्न में भी ना देह"

परमेश्वर कबीर जी ने स्वामी रामानंद जी, संत धर्मदास जी, संत गरीबदास जी, संत दादू जी तथा संत नानक देव जी को सत्यलोक में ले जाकर अपना परिचय करवाकर पृथ्वी पर शरीर में छोड़ा था।

मुर्दे को जिवित करना..!
कबीर साहेब ने दरिया में बह रहे मृत बालक कमाल तथा शेखतकी पीर मृत बेटी कमाली जो कई दिनों से कब्र में दफ़न थी, दोनों को हजारों लोगों के सामने जिवित किया था। समर्थ पूर्ण परमात्मा ऐसी ही आश्चर्य जनक लीलाएं करते हैं।


कबीर परमात्मा ने सिंकदर लोधी राजा का जलन का रोग समाप्त कर दिया।

साहेब कबीर जी ने सम्मन के मृत लड़के सेऊ के धड़ पर सिर लगा कर जीवित कर दिया था। कटे हुए का कोई निशान भी गर्दन पर नहीं था।

कबीर परमेश्वर ने एक मृतक गऊ तथा उसके बच्चे को जीवित कर दिया था जिसके टुकड़े सिंकदर लोधी ने करवाए थे।

‘मृत कमाल बालक को जीवित करना‘‘
किसी कबीले ने अपने 12 वर्षीय मृत लड़के का अंतिम संस्कार दरिया में जल प्रवाह करके कर दिया कबीर परमेश्वर ने अपनी वचन शक्ति से उस बच्चे को जीवित कर दिया तथा उसका नाम कमाल रख दिया।

कबीर परमेश्वर ने ऐसे कई अनगिनत चमत्कार किए हैं... जो सिर्फ पूर्ण परमेश्वर ही कर सकते हैं...क्योंकि वास्तव में कबीर परमेश्वर ही पूर्ण परमात्मा है ।

ऐसे ही सैकड़ो चमत्कार है जो कबीर साहिब जी ने किए जो अन्य कोई देव या महापुरुष नही कर सकता। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज एकमात्र पूर्ण संत है जो पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी को प्राप्त करने की सही भक्ति विधि बता रहे हैं अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 pm

Sunday, May 31, 2020

संत कबीर दास जी कौन थे..!



आज हम बात करते हैं संत कबीर जी के बारे में...!!

कबीर जी को लेकर कई दंत कथाएं प्रचलित हैं। उनको 15वीं शताब्दी में महान संत तथा कवि के रूप में जाना जाता था। वह बहुत पढ़े-लिखे नहीं थे परंतु उनको वेदों का पूर्ण ज्ञान था। उनका व्यक्तित्व तथा वेशभूषा बहुत ही साधारण थी तथा उन्होंने जातिवाद का पुऱजोर से खंडन किया। आज भी लोग कबीर जी को संत के रूप में ही देखते हैं ।



कबीर साहेब जी का जीवन परिचय...!!
कबीर जी के जन्म को लेकर भी समाज में कई धारणाएं व्याप्त हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उन्होंने नीरू नीमा के घर जन्म लिया। अन्य का मत है कि नीरू नीमा को कबीर साहेब शिशु रूप में लहरतारा तालाब पर मिले जो कि बिलकुल सत्य है।
इसका वर्णन कबीर साहेब ने अपनी एक वाणी में नीरू को आकाशवाणी के माध्यम से स्पष्ट किया जब वह नीमा के साथ कबीर जी को घर ना ले जाने के लिए विरोध कर रहे थे जो इस प्रकार है:-

द्वापर युग में तुम बालमिक जाती,
भक्ति शिव की करि दिन राती।
तुमरा एक बालक प्यारा,
वह था परम शिष्य हमारा।
सुपच भक्त मम प्राण प्यारा,
उससे था एक वचन हमारा।
ता करण हम चल आए,
जल पर प्रकट हम नारायण कहाऐ।
लै चलो तुम घर अपने,
कोई अकाज होये नहीं सपने।
बाचा बन्ध जा कारण यहाँ आए,
काल कष्ट तुम्हरा मिट जाए।
इतना सुनि कर जुलहा घबराया,
कोई जिन्द या ओपरा पराया।
मोकूँ कोई शाप न लग जाए,
ले बालक को घर कूँ आए।



कबीर जी का जन्म सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास सुदी पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घण्टा पहले) में काशी में हुआ। परंतु कबीर साहेब ने मां के गर्भ से जन्म नहीं लिया अपितु अपने निजधाम सतलोक से सशरीर आकर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए।
गरीबदास जी की वाणी है :-
गरीब, अनंत कोटी ब्रह्मांड में बंदीछोड़ कहाय।
सो तो एक कबीर है, जननी जन्या न माय।।
कबीर साहेब 600 वर्ष पूर्व शिशु रूप धर कर कमल के फूल पर प्रकट हुए थे उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ था इसलिए कबीर साहेब का प्रकट दिवस मनाया जाता है जयंती नहीं।

 कबीर साहिब चारों युगों में आते है।

सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।


परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्त्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं।

कबीर परमेश्वर सतयुग में सत सुकृत नाम से, त्रेता में मुनीँद्र नाम से, द्वापर युग में करुणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कवीरदेव (कबीर प्रभु) नाम से आए हैं।

त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र ऋषि के नाम से आए तथा शिशु रूप धारण करके कमल के फूल पर प्रकट हुए। त्रेता युग में उनकी परवरिश की लीला निसंतान दंपत्ति वेदविज्ञ नामक ऋषि तथा सूर्या नामक उनकी साध्वी पत्नी ने की।

द्वापर युग में कबीर परमेश्वर काशी नगर में एक सुदर्शन नाम के वाल्मीकि को मिले और उन्हें सृष्टि रचना सुनाई। उस समय कबीर परमेश्वर की लीलामय आयु 12 वर्ष की थी पुण्यात्मा सुदर्शन को सत्यलोक के दर्शन करा कर उन्हें नाम उपदेश देकर उनका कल्याण किया।

कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कलयुग में निसंतान दंपति नीरू और नीमा ने उनका पालन पोषण किया।
जिस कबीर जी को संत के रूप में जाना जाता है वह कबीर ही कबीर परमेश्वर है जो चारों युगों में अपने निजी स्थान सतलोक से चलकर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं तथा अपना यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान स्वयं कविताओं व लोकोक्तियों के माध्यम से बताते हैं
वह कबीर परमेश्वर है कौन है, कहां रहता है, कैसे मिलता है इन सब की जानकारी वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज सभी धार्मिक ग्रंथों को खोल खोल कर बता रहे हैं अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 pm


Friday, May 29, 2020

कबीर परमेश्वर चारों युगों में आते हैं

परमेश्वर कबीर जी का प्रकट होना...!!

ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूत में कबीर परमेश्वर अपने निजी स्थान सब लोग से लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। वहाँ से उन्हें नीरू नीमा नामक दंपति घर ले गए फिर घर पर 25 दिन तक कुछ नहीं खाया और एकदम स्वस्थ थे जैसे प्रतिदिन 1 किलो दूध पीते हो तो। 25 दिन की आयु में कबीर साहेब जी ने स्वयं बोल कर कहा कि मैं कुंवारी गाय का दूध पीता हूं मेरे लिए एक कुंवारी गाय बछिया लाओं। तब कबीर जी के आदेशानुसार एक कंवारी गाय की बछिया लाइ गई तब कबीर साहिब जी ने दूध पिया।



 परमेश्वर कबीर जी का नामकरण.!!
शिशु रूप कबीर परमेश्वर का नामकरण करने आए ब्राह्मणों, काजियों ने जब कुरान शरीफ को खोला तो कबीर नाम आया। तब पूरी कुरान का निरीक्षण किया तो उनके द्वारा लाई गई कुरान शरीफ में सर्व
अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए काजी बोले इस बालक ने कोई जादू मन्त्र करके हमारी कुरान शरीफ को ही बदल डाला। तब कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले हे काशी के काजियों। मैं कबीर अल्ला अर्थात् अल्लाहुअकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।



 कबीर परमेश्वर चारों युगों में अपने सत्य ज्ञान का प्रचार करने आते हैं। गरीब दास जी महाराज ने अपनी वाणी में कहा है "गरीब सतगुरु पुरुष कबीर है, चारों युग प्रवान, झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।"



कबीर परमेश्वर सतयुग में सत सुकृत नाम से, त्रेता में मुनीँद्र नाम से, द्वापर युग में करुणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कवीरदेव (कबीर प्रभु) नाम से आए हैं।

सतयुग में सतसुकृत नाम से कबीर परमेश्वर प्रकट हुए थे, उस समय के साधको और ऋषिमुनियों ने वास्तविक ज्ञान को स्वीकार नहीं किया तथा परमेश्वर कविर्देव जी को सतसुकृत के स्थान पर वामदेव कहने लगे थे।

त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र ऋषि के नाम से आए तथा शिशु रूप धारण करके कमल के फूल पर प्रकट हुए। त्रेता युग में उनकी परवरिश की लीला निसंतान दंपत्ति वेदविज्ञ नामक ऋषि तथा सूर्या नामक उनकी साध्वी पत्नी ने की।



कबीर परमेश्वर द्वापर युग में रामनगर नामक नगरी में एक सरोवर में कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए तथा एक निसंतान वाल्मीकि दंपत्ति कालू तथा गोदावरी को मिले व अपना  नाम करुणामय रखाया।

कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कलयुग में निसंतान दंपति नीरू और नीमा ने उनका पालन पोषण किया।

कबीर परमेश्वर चारों युगों में अपने सत्य ज्ञान का प्रचार करने आते हैं।
सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।।

पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं।


वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि कबीर जी ही वह पूर्ण परमेश्वर है जो चारों युगों में आते हैं वह अनेकों प्रकार की लीलाएं करते हैं अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं और अपने तत्वज्ञान को कविताओं व लोकोक्तियों के माध्यम से भगत समाज तक पहुँचाते है।
कबीर परमेश्वर के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए देखें साधना चैनल रात्रि 7:40 से 8:30 pm

Wednesday, May 20, 2020

प्राकृतिक आपदाएं एवं चुनौतियां

आज हम बात कर रहे हैं अचानक आने वाले प्राकृतिक आपदाओं के बारे में...!!

आपदा का अर्थ है, अचानक होने वाली एक विध्वंसकारी घटना जिससे व्यापक भौतिक क्षति होती है, जान-माल का नुकसान होता है।


मानव द्वारा अनेक प्रकार के अस्वस्थ क्रियाकलापों के कारण पर्यावरण के तत्वों एवं प्रकृति के सुसंचालन में बाधा उत्पन्न की जा रही है, परिणामस्वरूप जीवन-चक्र की गुणवत्ता में अंतर आता जा रहा है। प्राकृतिक आपदा का सीधा संबंध, पर्यावरण से है। आपदा जो प्रकृति के कारण हो वह प्राकृतिक आपदा है। प्राकृतिक आपदा आज विश्वव्यापी है। भूकंप, बाढ़, हिस्खलन, दावानल, तड़ित, चक्रवात, सुनामी लहर, सूखा, हेल्सटॉर्म, लू, हरिकेन, टायफून, आइस एज, टोरनेडो, लैला, संक्रामक रोग (स्वाइन फ्लू, प्लेग, हैजा आदि) पर्यावरण असंतुलन आदि प्राकृतिक आपदा से संबंधित हैं।


आपदा चाहे प्राकृतिक हों या मानवजनित यह दोनों रूपों में घटित होकर मानव जीवन को प्रभावित करती हैं। आपदा का दुःखद परिणाम अन्ततः जन-धन व सम्पदा के नुकसान के रूप में हमारे सामने आता है।



धरती पर जीवन का आरम्भ और जीवन को चलाए रखने का काम प्रकृति की बड़ी पेचीदा प्रक्रिया है। इसे पूरी तरह समझ पाना अति कठिन है। फिर भी हजारों सालों में मनुष्य ने अनुभव और विज्ञान की मदद से इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश की है। जिसके महत्वपूर्ण निष्कर्ष ये हैं कि प्रकृति ने जो कुछ पैदा किया वह फिजूल नहीं है। हर जीव का अपना महत्व है। वनस्पति से लेकर जीवाणुओं, कीड़े-मकोड़ों और मानव तक की जीवन प्रक्रिया को चलाए रखने में अपना-अपना योगदान रहा है। किंतु इस सारी प्रक्रिया में संतुलन बना रहना चाहिए। कोई भी प्राणी सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ना चाहिए।

पिछले कुछ दशकों में अनियोजित विकास के कारण पहाड़ों में भू-कटाव और भूस्खलन की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। अनियोजित विकास, प्राकृतिक संसाधनों के निर्मम दोहन व बढ़ते शहरीकरण की स्थिति ने यहाँ के पर्यावरणीय सन्तुलन को बिगाड़ दिया है। इसके चलते प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हो रही है। जनसंख्या का अधिक दबाव, जन-जागरूकता की कमी, पूर्व-सूचनाओं व संचार साधनों की समुचित व्यवस्था न होने जैसे कारणों से प्राकृतिक आपदाओं से जन-धन की हानि में व्यापक स्तर पर वृद्धि हो रही है।



असमय आने वाली प्रमुख आपदाएं...!!

जल एवं जलवायु से जुड़ी आपदाएं, चक्रवात, बवण्डर एवं तूफान, ओलावृष्टि, बादल फटना, लू व शीतलहर, हिमस्खलन, सूखा, समुद्ररक्षण, मेघगर्जन व बिजली का कड़कना;

भूमि संबंधी आपदाएं, भूस्खलन एवं कीचड़ का बहाव, भूकंप, बांध का टूटना, खदान में आग;

दुर्घटना संबंधी आपदाएं, जंगलों में आग लगना, शहरों में आग लगना, खदानों में पानी भरना, तेल का फैलाव, प्रमुख इमारतों का ढहना, एक साथ कई बम विस्फोट, बिजली से आग लगना, हवाई, सड़क एवं रेल दुर्घटनाएं,
जैविक आपदाएं, महामारियां, कीटों का हमला, पशुओं की महामारियां, जहरीला भोजन;

रासायनिक, औद्योगिक एवं परमाणु संबंधी आपदाएं, रासायनिक गैस का रिसाव, परमाणु बम गिरना।
इनके अतिरिक्त नागरिक संघर्ष, सांप्रदायिक एवं जातीय हिंसा, आदि भी आज प्रमुख आपदाएं हैं।

अगर समय रहते हम इन चुनौतियों को काबू में नहीं कर पाते हैं तो पूरी मानव-जाति के साथ-साथ पर्यावरण का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। अतः हमें समय रहते कारगर नीति बनानी होगी।


प्राकृतिक आपदा जैसी समस्याओं से निपटने के लिए हमे आध्यात्मिक की ओर बढ़ना होगा। आध्यात्मिक ज्ञान से हमें जानकारी होगी कि मनुष्य द्वारा अपने स्वाद के लिए निर्दोष जीवो की निर्मम हत्या करके उनको खाया जाता है जिससे वह पाप का भागी तो बनता ही हैं साथ ही प्रकृति संतुलन को भी नुकसान पहुंचाता हैं।

वही मानव द्वारा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्राकृतिक संसाधनों का निर्मम दोहन किया जा रहा है आध्यात्मिक ज्ञान से हम फिजूल आवश्यकताओं को सीमित रखकर व अपने सामाजिक जीवन को साधारण सिंपल बना कर प्रकृति को बचा सकते हैं

अधिक जानकारी के लिए देखिये साधना चैंनल रात्रि 7:30-8:30 pm

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Thursday, May 14, 2020

पर्यावरण में सुधार

देश में पर्यावरण की स्थिति और चुनौतियाँ..!!

पर्यावरण शब्द परि+आवरण के संयोग से बना है। 'परि' का आशय चारों ओर तथा 'आवरण' का आशय परिवेश है। दूसरे शब्दों में कहें तो पर्यावरण अर्थात वनस्पतियों ,प्राणियों,और मानव जाति सहित सभी सजीवों और उनके साथ संबंधित भौतिक परिसर को पर्यावरण कहतें हैं वास्तव में पर्यावरण में वायु ,जल ,भूमि ,पेड़-पौधे , जीव-जन्तु ,मानव और उसकी विविध गतिविधियों के परिणाम आदि सभी का समावेश होता हैं।

                  कारखानों द्वारा धुएँ का उत्सर्जन

भारत में पर्यावरण की कई समस्या है। वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, कचरा, और प्राकृतिक पर्यावरण के प्रदूषण भारत के लिए चुनौतियाँ हैं। पर्यावरण की समस्या की परिस्थिति 1947 से 1995 तक बहुत ही खराब थी। 1995 से 2010 के बीच विश्व बैंक के विशेषज्ञों के अध्ययन के अनुसार, अपने पर्यावरण के मुद्दों को संबोधित करने और अपने पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार लाने में भारत दुनिया में सबसे तेजी से प्रगति कर रहा है। फिर भी, भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के स्तर तक आने में इसी तरह के पर्यावरण की गुणवत्ता तक पहुँचने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है।
भारत के लिए एक बड़ी चुनौती और अवसर है। पर्यावरण की समस्या का, बीमारी, स्वास्थ्य के मुद्दों और भारत के लिए लंबे समय तक आजीविका पर प्रभाव का मुख्य कारण हैं।

तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या व आर्थिक विकास और शहरीकरण व औद्योगीकरण में अनियंत्रित वृद्धि, बड़े पैमाने पर औद्योगीक विस्तार तथा तीव्रीकरण, तथा जंगलों का नष्ट होना इत्यादि भारत में पर्यावरण संबंधी समस्याओं के प्रमुख कारण हैं।

प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दों में वन और कृषि-भूमिक्षरण, संसाधन रिक्तीकरण (पानी, खनिज, वन, रेत, पत्थर आदि), पर्यावरण क्षरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव विविधता में कमी, पारिस्थितिकी प्रणालियों में लचीलेपन की कमी, गरीबों के लिए आजीविका सुरक्षा शामिल हैं


पर्यावरण के सामने खड़ी बड़ी चुनौतियां..!!

वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन आबोहवा और समुद्री जल कार्बन से भर चुका है.
जंगलों की कटाई कई प्रकार के पौधों और जन्तुओं को आसरा देने वाले जंगल काटे जा रहे हैं।
लुप्त होती प्रजातियां 
मिट्टी का क्षरण
अति आबादी 
वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन 
जंगलों की कटाई
लुप्त होती प्रजातियां


आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है लेकिन आज लोगों में इसे लेकर कोई जागरूकता नहीं है। ग्रामीण समाज को छोड़ दें तो भी महानगरीय जीवन में इसके प्रति खास उत्सुकता नहीं पाई जाती। परिणामस्वरूप पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेण्डा ही बन कर रह गया है। जबकि यह पूरे समाज से बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध रखने वाला सवाल है। जब तक इसके प्रति लोगों में एक स्वाभाविक लगाव पैदा नहीं होता, पर्यावरण संरक्षण एक दूर का सपना ही बना रहेगा।





पर्यावरण का सीधा सम्बन्ध प्रकृति से है। अपने परिवेश में हम तरह-तरह के जीव-जन्तु, पेड़-पौधे तथा अन्य सजीव-निर्जीव वस्तुएँ पाते हैं। ये सब मिलकर पर्यावरण की रचना करते हैं। विज्ञान की विभिन्न शाखाओं जैसे-भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान, आदि में विषय के मौलिक सिद्धान्तों तथा उनसे सम्बन्ध प्रायोगिक विषयों का अध्ययन किया जाता है। परन्तु आज की आवश्यकता यह है कि पर्यावरण के विस्तृत अध्ययन के साथ-साथ इससे सम्बन्धित व्यावहारिक ज्ञान पर बल दिया जाए। आधुनिक समाज को पर्यावरण से सम्बन्धित समस्याओं की शिक्षा व्यापक स्तर पर दी जानी चाहिए। साथ ही इससे निपटने के बचावकारी उपायों की जानकारी भी आवश्यक है। 


आज के मशीनी युग में हम ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं। प्रदूषण एक अभिशाप के रूप में सम्पूर्ण पर्यावरण को नष्ट करने के लिए हमारे सामने खड़ा है। सम्पूर्ण विश्व एक गम्भीर चुनौती के दौर से गुजर रहा है। यद्यपि हमारे पास पर्यावरण सम्बन्धी पाठ्य-सामग्री की कमी है तथापि सन्दर्भ सामग्री की कमी नहीं है। वास्तव में आज पर्यावरण से सम्बद्ध उपलब्ध ज्ञान को व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता है ताकि समस्या को जनमानस सहज रूप से समझ सके। ऐसी विषम परिस्थिति में समाज को उसके कर्त्तव्य तथा दायित्व का एहसास होना आवश्यक है। 




आज वायु प्रदूषण ने भी हमारे पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचाई है। जल प्रदूषण के साथ ही वायु प्रदूषण भी मानव के सम्मुख एक चुनौती है। माना कि आज मानव विकास के मार्ग पर अग्रसर है परंतु वहीं बड़े-बड़े कल-कारखानों की चिमनियों से लगातार उठने वाला धुआं, रेल व नाना प्रकार के डीजल व पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के पाइपों से और इंजनों से निकलने वाली गैसें तथा धुआं, जलाने वाला हाइकोक, ए.सी., इन्वर्टर, जेनरेटर आदि से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड प्रति क्षण वायुमंडल में घुलते रहते हैं। वस्तुतः वायु प्रदूषण सर्वव्यापक हो चुका है।

सही मायनों में पर्यावरण पर हमारा भविष्य आधारित है, जिसकी बेहतरी के लिए ध्वनि प्रदूषण को और भी ध्यान देना होगा। अब हाल यह है कि महानगरों में ही नहीं बल्कि गाँवों तक में लोग ध्वनि विस्तारकों का प्रयोग करने लगे हैं। बच्चे के जन्म की खुशी, शादी-पार्टी सभी में डी.जे. एक आवश्यकता समझी जाने लगी है। जहां गाँवों को विकसित करके नगरों से जोड़ा गया है। वहीं मोटर साइकिल व वाहनों की चिल्ल-पों महानगरों के शोर को भी मुँह चिढ़ाती नजर आती है। औद्योगिक संस्थानों की मशीनों के कोलाहल ने ध्वनि प्रदूषण को जन्म दिया है। इससे मानव की श्रवण-शक्ति का ह्रास होता है। ध्वनि प्रदूषण का मस्तिष्क पर भी घातक प्रभाव पड़ता है।

जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और ध्वनि तीनों ही हमारे व हमारे फूल जैसे बच्चों के स्वास्थ्य को चौपट कर रहे हैं। ऋतुचक्र का परिवर्तन, कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा का बढ़ता हिमखंड को पिघला रहा है। सुनामी, बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि या अनावृष्टि जैसे दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं, जिन्हें देखते हुए अपने बेहतर कल के लिए ‘5 जून’ को समस्त विश्व में ‘पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है।


उपर्युक्त सभी प्रकार के प्रदूषण से बचने के लिए यदि थोड़ा सा भी उचित दिशा में प्रयास करें तो बचा सकते हैं।


सर्वप्रथम हमें आध्यात्मिक और बढ़ना होगा आध्यात्मिक से हमें ज्ञान होगा की आजीविका के लिए हमें अधिक संसाधनों की आवश्यकता नही होगी अगर हम अपना जीवन सिंपल-साधारण तरीके से व्यापन करेंगे व अपनी जीवन शैली में किसी प्रकार का दिखावा आडंबर व फिजूलखर्ची डीजे , साउंड आदि का प्रयोग ना करें तो। वातावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।
आध्यात्मिक ज्ञान से ही मानव विचारों में शुद्धता आएगी..!

 वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज अपने आध्यात्मिक ज्ञान से व उनके द्वारा बताई गई सतभक्ति से मानव के विचारों में आध्यात्मिक परिवर्तन के साथ ही किसी भी प्रकार का पाखंड, आडंबर व दिखावा नही करने की सलाह देते हैं...!!



 जिसमें वातावरण शुद्धताके साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन भी किए जा रहे हैं अधिक जानकारी के लिए देखें साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 pm






Wednesday, May 13, 2020

सत भक्ति न मिलने के कारण लोगों का नास्तिक होना स्वाभाविक है

आइये जानते हैं नास्तिक होने का क्या कारण है....??


अगर “ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास” की दृष्टि से देखा जाये तो दुनिया में दो प्रकार के लोग होते है – एक आस्तिक, दूसरा नास्तिक । आस्तिक उसे कहते है जो ईश्वर के अस्तित्व को मानता है । इसके विपरीत नास्तिक उसे कहते है जो ईश्वर के अस्तित्व को नहीं मानता ।

  जिन लोगो को सही भक्ति मार्ग प्राप्त नही हुआ, गलत साधना करने से दुःख दूर नही हुए वे लोग भगवान से दूर होते चले गए। और नास्तिक बन गए। नास्तिक लोग ईश्वर (भगवान) के अस्तित्व का स्पष्ट प्रमाण न होने के कारण झूठ करार देते हैं। अधिकांश नास्तिक लोग किसी भी देवी देवता, परालौकिक शक्ति, धर्म और आत्मा को नहीं मानते। ओर न ही वेदों को मान्यता देते। नास्तिक मानने के स्थान पर जानने पर विश्वास करते हैं।
वहीं आस्तिक किसी न किसी ईश्वर की धारणा को अपने संप्रदाय, जाति, कुल या मत के अनुसार बिना किसी प्रमाणिकता के स्वीकार करता है। जबकि नास्तिक लोग इसे अंधविश्वास कहते है..!!


क्या ईश्वर का अस्तित्व है ?

सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जानते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व है या नहीं...!!


आइये जानते है हमारे सद्ग्रन्थ क्या कहते है?

गीता में प्रमाण - गीता अध्याय 8 श्लोक 9 में पूर्ण परमात्मा का नाम कविम् बताया है।
कुरान में प्रमाण - कुरान शरीफ सूरत फुर्कानि 25 आयत 52, 58, 59 में परमात्मा काम कबीर/ खबीरा/ कबीरन है।
गुरूग्रंथसाहिब में प्रमाण - गुरूग्रंथसाहिब साहिब राग तिलंग महला 1 पृष्ठ 721 - हक्का कबीर करीम तू बैएब परवरदिगार,
राग सिरी महला 1 पृष्ठ 24 - धाणक रूप रहा करतार
बाइबिल में प्रमाण - अय्यूब 36: 5 (और्थोडौक्स यहूदी बाइबल - OJB) (परमेश्वर कबीर शक्तिशाली है)
वेद में प्रमाण- वेदों में में कई जगह परमेश्वर कबीर साहेब के प्रमाण है। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मन्त्र 17, 18, 19, 20
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 90 मन्त्र 3, 4, 5, 15, 16
यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 26, 30
यजुर्वेद अध्याय 29 मन्त्र 25
सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खण्ड 25 श्लोक 8
सामवेद संख्या 1400 अध्याय 12 खण्ड 3 श्लोक 5
अथर्वेद कांड 4 अनुवाक 1 मन्त्र 1 से 7

जिन सन्तो को परमात्मा मिले -
गरीब दास जी : -
अनंत कोटि ब्रह्मण्ड का, एक रति नहीं भार।
सतगुरू पुरूष कबीर हैं, ये कुल के सृजनहार।।
हम सुल्तानी नानक तारे, दादू को उपदेश दिया।
जात जुलाहा भेद न पाया, काशी माही कबीर हुआ।।
सतगुरु पुरुष कबीर है चारों युग प्रमाण
झूठे गुरुवा मर गए हो गए भूत मसाण।।
नानक देव जी : -
खालक आदम सिरजिआ,आलम बड़ा कबीर।
क़ाइम दाइम कुदरती, सिर पीरा दे पीर।।
संत रविदास जी : -
साहेब कबीर शमर्थ हैं, आदि अंत सर्वकाल।
ज्ञान गम्या से दे दिया, कहे रैदास दयाल।।
संत नाभा दास जी : -
वाणी अरबों खरबों ,ग्रंथ कोटी हजार।
करता पुरुष कबीर है, रहे नाभे विचार।।
संत गोरख नाथ जी : -
नौ नाथ चौरासी सिद्धा, इनका अंधा ज्ञान।
अविचल ज्ञान कबीर का, यो गति बिरला जान।।
दादू जी : -
जिन मोकू निज नाम दिया, सोई सतगुरू हमार।।
दादू दूसरा कोई नहीं, वो कबीर सृजनहार।।
और संत सब कूप है केते झरिता नीर।
दादू अगम अपार है दरिया सत्य कबीर।।
स्वामी रामानंद जी : -
तुम स्वामी मैं बालक बुद्धि, धर्म-कर्म किए नाश।
कहे रामानंद विज ब्रह्म तुम, हमरा दृढ़ विश्वास।।
बोलत रामानंद जी, सुनो कबीर करतार।
गरीबदास सब रूप में, तुम ही बोलनहार।।
संत धर्मदास जी : -
बाजा बाजा रहित का, परा नगर में जोर।
सतगुरु खसम कबीर हैं, नजर न आवे और।।

 सही भगवान की जानकारी और सत्य साधना नहीं मिलने के कारण लोग नासिक होते चले गए...! शास्त्र अनुकूल सही साधन नहीं मिलने के कारण लोगों की मानसिकता हो गई की भगवान है ही नहीं...!!  सर्व ब्रह्मांड पशु, पक्षी, जीव जंतु अपने आप ही बनता और बिगड़ता है जीव अपने आप ही उत्पन्न होता है और नष्ट हो जाता है भगवान है ही नहीं..!!
लोगों को लगता है कि सब कुछ भ्रमणा है इसी नकारात्मक मानसिकता के आधार पर लोग अपना अनमोल मनुष्य जीवन बर्बाद कर देते हैं


 परंतु अब यह समझना होगा कि जिस प्रक्रिया द्वारा हम भगवान को खोज रहे थे वह प्रक्रिया ही गलत थी यह नहीं कि भगवान है ही नहीं..!
 जबकि परमात्मा है उसकी शास्त्र अनुकूल साधना भक्ति करने से पूर्ण मोक्ष की प्राप्ति होती है अन्य मनमानी साधना करने से नहीं। सही गुरु व सत मार्ग का अभाव जीव के दुखों का कारण बनता है पूर्णगुरु की जानकारी प्राप्त करने के लिए देखिए साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 pm
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राम कौन है...?? रामचन्द्र भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, और इन्हें श्रीराम और श्रीरामचंद्र के नामों से भी जाना जाता है। रामायण में वर्णन ...