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Tuesday, June 2, 2020

कबीर साहेब जी के चमत्कार...!!


600 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर जी सतलोक से सशरीर चलकर आये तब अनेकों चमत्कार किये जो केवल समरथ भगवान ही कर सकता है इस प्रकार है...!!!



कबीर परमेश्वर जी ने मगहर रियासत में 14वी शताब्दी में पड़े भीषण अकाल को अपनी समर्थ शक्ति से टालकर वर्षा करके सबको जीवनदान दिया। हजारों हिंदू-मुसलमानों ने उपदेश लिया। एक 70 वर्षीय निःसंतान मुसलमान दंपती को पुत्र होने का आशीर्वाद दिया। वर्तमान में उस व्यक्ति का एक पूरा मौहल्ला बना हुआ है, नाम है "मौहल्ला कबीर करम"


स्वामी रामानंद जी के शिष्य सर्वानंंद जी एक बार कबीर साहेब से ज्ञान चर्चा करने गए।
कबीर साहिब ने उन्हें शास्त्रार्थ में हरा दिया। लेकिन उपस्थित लोगों ने सर्वानंद को धारा प्रवाह संस्कृत बोलते देख यह कहा कि सर्वानंद शास्त्रार्थ में जीत गए।
कबीर साहिब ने कहा कि आप सामने लिखे शास्त्रों की सच्चाई को भी नहीं मान रहे हो। जो जानबूझकर सोने का बहाना कर रहा है उसे जगाया नहीं जा सकता।
"कबीर जानबूझ साची तजे, करे झूठे से नेह, ताकि संगति हे प्रभु, स्वप्न में भी ना देह"

परमेश्वर कबीर जी ने स्वामी रामानंद जी, संत धर्मदास जी, संत गरीबदास जी, संत दादू जी तथा संत नानक देव जी को सत्यलोक में ले जाकर अपना परिचय करवाकर पृथ्वी पर शरीर में छोड़ा था।

मुर्दे को जिवित करना..!
कबीर साहेब ने दरिया में बह रहे मृत बालक कमाल तथा शेखतकी पीर मृत बेटी कमाली जो कई दिनों से कब्र में दफ़न थी, दोनों को हजारों लोगों के सामने जिवित किया था। समर्थ पूर्ण परमात्मा ऐसी ही आश्चर्य जनक लीलाएं करते हैं।


कबीर परमात्मा ने सिंकदर लोधी राजा का जलन का रोग समाप्त कर दिया।

साहेब कबीर जी ने सम्मन के मृत लड़के सेऊ के धड़ पर सिर लगा कर जीवित कर दिया था। कटे हुए का कोई निशान भी गर्दन पर नहीं था।

कबीर परमेश्वर ने एक मृतक गऊ तथा उसके बच्चे को जीवित कर दिया था जिसके टुकड़े सिंकदर लोधी ने करवाए थे।

‘मृत कमाल बालक को जीवित करना‘‘
किसी कबीले ने अपने 12 वर्षीय मृत लड़के का अंतिम संस्कार दरिया में जल प्रवाह करके कर दिया कबीर परमेश्वर ने अपनी वचन शक्ति से उस बच्चे को जीवित कर दिया तथा उसका नाम कमाल रख दिया।

कबीर परमेश्वर ने ऐसे कई अनगिनत चमत्कार किए हैं... जो सिर्फ पूर्ण परमेश्वर ही कर सकते हैं...क्योंकि वास्तव में कबीर परमेश्वर ही पूर्ण परमात्मा है ।

ऐसे ही सैकड़ो चमत्कार है जो कबीर साहिब जी ने किए जो अन्य कोई देव या महापुरुष नही कर सकता। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज एकमात्र पूर्ण संत है जो पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी को प्राप्त करने की सही भक्ति विधि बता रहे हैं अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 pm

Sunday, May 31, 2020

संत कबीर दास जी कौन थे..!



आज हम बात करते हैं संत कबीर जी के बारे में...!!

कबीर जी को लेकर कई दंत कथाएं प्रचलित हैं। उनको 15वीं शताब्दी में महान संत तथा कवि के रूप में जाना जाता था। वह बहुत पढ़े-लिखे नहीं थे परंतु उनको वेदों का पूर्ण ज्ञान था। उनका व्यक्तित्व तथा वेशभूषा बहुत ही साधारण थी तथा उन्होंने जातिवाद का पुऱजोर से खंडन किया। आज भी लोग कबीर जी को संत के रूप में ही देखते हैं ।



कबीर साहेब जी का जीवन परिचय...!!
कबीर जी के जन्म को लेकर भी समाज में कई धारणाएं व्याप्त हैं। कुछ लोगों का मानना है कि उन्होंने नीरू नीमा के घर जन्म लिया। अन्य का मत है कि नीरू नीमा को कबीर साहेब शिशु रूप में लहरतारा तालाब पर मिले जो कि बिलकुल सत्य है।
इसका वर्णन कबीर साहेब ने अपनी एक वाणी में नीरू को आकाशवाणी के माध्यम से स्पष्ट किया जब वह नीमा के साथ कबीर जी को घर ना ले जाने के लिए विरोध कर रहे थे जो इस प्रकार है:-

द्वापर युग में तुम बालमिक जाती,
भक्ति शिव की करि दिन राती।
तुमरा एक बालक प्यारा,
वह था परम शिष्य हमारा।
सुपच भक्त मम प्राण प्यारा,
उससे था एक वचन हमारा।
ता करण हम चल आए,
जल पर प्रकट हम नारायण कहाऐ।
लै चलो तुम घर अपने,
कोई अकाज होये नहीं सपने।
बाचा बन्ध जा कारण यहाँ आए,
काल कष्ट तुम्हरा मिट जाए।
इतना सुनि कर जुलहा घबराया,
कोई जिन्द या ओपरा पराया।
मोकूँ कोई शाप न लग जाए,
ले बालक को घर कूँ आए।



कबीर जी का जन्म सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास सुदी पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त (सूर्योदय से लगभग डेढ़ घण्टा पहले) में काशी में हुआ। परंतु कबीर साहेब ने मां के गर्भ से जन्म नहीं लिया अपितु अपने निजधाम सतलोक से सशरीर आकर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए।
गरीबदास जी की वाणी है :-
गरीब, अनंत कोटी ब्रह्मांड में बंदीछोड़ कहाय।
सो तो एक कबीर है, जननी जन्या न माय।।
कबीर साहेब 600 वर्ष पूर्व शिशु रूप धर कर कमल के फूल पर प्रकट हुए थे उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ था इसलिए कबीर साहेब का प्रकट दिवस मनाया जाता है जयंती नहीं।

 कबीर साहिब चारों युगों में आते है।

सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान।
झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।


परमात्मा कविर्देव (कबीर परमेश्वर) वेदों के ज्ञान से भी पूर्व सतलोक में विद्यमान थे तथा अपना वास्तविक ज्ञान (तत्त्वज्ञान) देने के लिए चारों युगों में भी स्वयं प्रकट हुए हैं। सतयुग में सतसुकृत नाम से, त्रेतायुग में मुनिन्द्र नाम से, द्वापर युग में करूणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कविर्देव (कबीर प्रभु) नाम से प्रकट हुए हैं।

कबीर परमेश्वर सतयुग में सत सुकृत नाम से, त्रेता में मुनीँद्र नाम से, द्वापर युग में करुणामय नाम से तथा कलयुग में वास्तविक कवीरदेव (कबीर प्रभु) नाम से आए हैं।

त्रेता युग में कबीर परमेश्वर मुनींद्र ऋषि के नाम से आए तथा शिशु रूप धारण करके कमल के फूल पर प्रकट हुए। त्रेता युग में उनकी परवरिश की लीला निसंतान दंपत्ति वेदविज्ञ नामक ऋषि तथा सूर्या नामक उनकी साध्वी पत्नी ने की।

द्वापर युग में कबीर परमेश्वर काशी नगर में एक सुदर्शन नाम के वाल्मीकि को मिले और उन्हें सृष्टि रचना सुनाई। उस समय कबीर परमेश्वर की लीलामय आयु 12 वर्ष की थी पुण्यात्मा सुदर्शन को सत्यलोक के दर्शन करा कर उन्हें नाम उपदेश देकर उनका कल्याण किया।

कलयुग में कबीर परमेश्वर अपने वास्तविक नाम कबीर रूप में काशी नगरी में लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर अवतरित हुए।
कलयुग में निसंतान दंपति नीरू और नीमा ने उनका पालन पोषण किया।
जिस कबीर जी को संत के रूप में जाना जाता है वह कबीर ही कबीर परमेश्वर है जो चारों युगों में अपने निजी स्थान सतलोक से चलकर आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं तथा अपना यथार्थ आध्यात्मिक ज्ञान स्वयं कविताओं व लोकोक्तियों के माध्यम से बताते हैं
वह कबीर परमेश्वर है कौन है, कहां रहता है, कैसे मिलता है इन सब की जानकारी वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज सभी धार्मिक ग्रंथों को खोल खोल कर बता रहे हैं अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना चैनल रात्रि 7:30 से 8:30 pm


असली राम कौन है

राम कौन है...?? रामचन्द्र भगवान विष्णु के सातवें अवतार हैं, और इन्हें श्रीराम और श्रीरामचंद्र के नामों से भी जाना जाता है। रामायण में वर्णन ...